सूखा तालाब, एक कहानी अनकही,
जल था जिसमें कभी, अब रेत ही रेत बिछी।
किनारे पर खड़े वृक्ष, बिन पत्तों के अधूरे,
जैसे पूछ रहे हों, 'पानी कहाँ चला गया दूरे?'
फोटो विवरण : ग्राम बूढ़ पंचायत समिति गंगरार में बारिश कि बाट जोटता तालाब
चिड़ियाँ नहीं चहकतीं, मछलियाँ नहीं तैरतीं,
बस धूप तपती रहती, और धरती रहती है सहती।
ये सुखा तालाब बतलाता, जल संरक्षण की जरूरत,
जीवन के लिए जल है अनमोल, ये सच है मजबूत।

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