चांद तारों की गवाही से जुदा, आसमान में खो जाने की चाह, जब रात की चादर धक जाती है, तो वो चांद अपनी कहानी सुनाता है।
उसकी चाहत भी तारों से ज्यादा दूर, जैसे वो अपनी रौशनी को छुपाता है, जब रात की गहराईयों में खो जाता है, तो वो चांद अपनी कहानी सुनाता है।
उसकी राहों में तारे बिखरे होते हैं, जैसे वो अपनी खोई हुई ख्वाहिशों को ढूंढता है, जब रात की अंधेरी गलियों में घूमता है, तो वो चांद अपनी कहानी सुनाता है।
चांद तारों की गवाही से जुदा, वो अपनी अनगिनत राज़ों को छुपाता है, जब रात की चादर धक जाती है, तो वो चांद अपनी कहानी सुनाता है।

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