जल की बूँद-बूँद कीमती है। ***** स्नान बाल्टी में पानी भरकर करे, फव्वारे से नहीं। ***** शेव व दंत मंजन मग में पानी भरकर करें, नल लगातार चालू रखकर नहीं। ***** कपडों की धुलाई बाल्टी में पानी भरकर करें, नल लगातार चालू रखकर नहीं। ***** वाहन बाल्टी में पानी भरकर साफ करें, नल से पाईप लगाकर नहीं। ***** पौधे लगे गमलों में पानी मग से डालें, नल में पाइप लगाकर नहीं। ***** घर के फर्श की धुलाई बाल्टी से पानी डालकर करें, नल में पाइप लगाकर नहीं। ***** खराब नल से टपकता पानी बंद करने के लिये तुरन्त कार्यवाही करें, आलस नहीं। ***** जल सम्पदा सीमित है इसका मितव्ययता पूर्वक सदुपयोग करें, अपव्यय नहीं। ***** जब पानी बिकेगा तोल, तब समझोगे इसका मोल! ***** बूँद-बूँद पानी, बचाऐ सो ज्ञानी।

बरगद की छांव

बरगद की छांव में, जहां धरती से मिलता आसमान, वहां बैठकर कुछ पल, जी लेता हूँ मैं अपनी जिंदगानी।

उसकी जड़ें गहरी हैं, उसकी शाखाएँ फैली हुई, जैसे बुजुर्गों का आशीर्वाद, सदा सर पर छाया हुआ।


गर्मी की दोपहरी में, जब सूरज दिखता रूठा-रूठा, बरगद की छांव बन जाती, मेरे लिए एक सुखद सुथरा।

चिड़ियों का चहचहाना, हवा का गुनगुनाना, बरगद की छांव में बैठ, सब कुछ भूल जाना।





ये बरगद नहीं, एक दुनिया है अपनी, जहां हर रिश्ता, हर याद बसी है गहरी।

इस छांव में बैठ, याद करता हूँ वो पुरानी बातें, जहां दादी की कहानियाँ, और बचपन की वो साथी।


बरगद की छांव, एक पाठशाला है जीवन की, जहां सिखने को मिलता, प्रकृति का हर एक मंत्र।

इसलिए आज भी, जब भी मिलता समय, बरगद की छांव में जाकर, बिताता हूँ कुछ पल शांति के।


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