दिनांक: 23 जून 2025 सोमवार
स्थान: जलदाय विभाग परिसर रावतभाटा , राजस्थान
आज जब सुबह उठकर खिड़की खोली, तो एक ठंडी-सी हवा ने चेहरे को छुआ—जैसे महीनों से गर्मी की तपिश सहने के बाद प्रकृति ने राहत की साँस ली हो। रावतभाटा में अब मुझे पाँच महीने हो गए हैं। ऐसा लग रहा है जैसे यह जगह अब सिर्फ “कार्यस्थल” नहीं रही—यह मेरा अपना एक हिस्सा बन गई है।
गर्मी का मौसम यहाँ कड़ा था—कभी-कभी लगता था चंबल की लहरें भी पसीना बहा रही हैं। पर अब मौसम बदल गया है। मानसून का आगमन हो गया है | आसमान में बादलों की आवाजाही है, और धरती की ख़ुशबू कुछ ऐसी है मानो सूखी आत्मा को फिर से जीने की वजह मिल गई हो।
आज का दिन कुछ अलग था — एक धीमी शुरुआत, लेकिन गहराई लिए हुए। सुबह जब कार्यालय पहुँचा, तो वातावरण में एक विशेष प्रकार की नमी महसूस हुई। मानो हवा भी अब तक के तनाव को धोकर एक नई शुरुआत का सन्देश ला रही हो।
कार्यालय में अब न केवल व्यवस्था आ रही है, बल्कि कार्यों की प्राथमिकता तय करने, सहयोगियों के साथ संवाद बढ़ाने और नए कार्यों की रणनीति बनाने की स्पष्टता भी। यह एक नया चरण है — सिर्फ भौतिक बदलाव नहीं, मानसिक ढाँचे में भी परिवर्तन।
आज का दिन कुछ कह गया — शायद यही कि बदलाव बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होता है। और जब वातावरण उसे साथ देता है, तो वह बदलाव संपूर्ण हो जाता है।

No comments:
Post a Comment